राजनीति में समीकरण बनने और बिगड़ने में महीन सा फासला होता है। कई बार जो दिखता है, वह सच नहीं होता और जो नहीं दिखता है वह सच हो जाता है। राजस्थान विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यही कुछ नजर आ रहा है। कुछ महीने पहले तक कांग्रेस आपसी कलह को लेकर सुर्खियां बटोर रही थी लेकिन कांग्रेस में एक बारगी ‘शांति’ है लेकिन भाजपा पूरी तरह ‘अशांत’ हो गई, लगती है। कद्दावर दलित नेता व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल स्पष्ट कहते हैं, ‘बीजेपी में राठौड़ गुट, पूनिया गुट, शेखावट गुट सहित और भी कई गुट हैं। मुझे इसलिए हटाया है क्योंकि मैं वसुंधराराजे गुट से हूं।’
जाहिर है, परिवर्तन यात्रा के दौरान गुटबाजी खुलकर देखने को मिली थी। अब बड़ी खबर यह है कि बीजेपी करीब 40 वरिष्ठ नेताओं के टिकट काटने का मन बना चुकी है। इनमें अधिकांश राजे समर्थक होंगे क्योंकि पार्टी को लगता है कि इनके जीतते ही राजे फिर मजबूत होकर सीएम पद पर दावेदारी जता सकती हैं। बताया जा रहा है कि टिकट कटने की स्थिति में अधिकांश नेता बीजेपी को अलविदा कहने की तैयारी में हैं।
बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ‘भटनेर पोस्ट डॉट कॉम’ से कहते हैं, ‘इसमें दो राय नहीं कि पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। गुटबाजी चरम पर है। हालांकि उम्मीद है केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आकर सब कुछ ठीक कर देंगे। क्योंकि उनके समझाने का तरीका कुछ अलग ही है और आज के वक्त कोई भी नेता अमित शाह या नरेंद्र मोदी को चुनौती देने की स्थिति में नहीं है।’
तो क्या टिकट कटने के बाद अधिकांश नेता बीजेपी छोड़ देंगे ? इस सवाल पर बीजेपी नेता कहते हैं कि यह तो वक्त बताएगा। अभी कयास लगाए जा रहे हैं। सच तो यह है कि अभी यह भी क्लीयर नहीं कि किस नेता का टिकट कट रहा है और किस नेता का नहीं। भाजपा की सरकार बनानी है तो आलाकमान को भी मनमर्जी करने से गुरेज करना होगा वरना जनता आलाकमान के हिसाब से सोचने वाली नहीं है। अगर ऐसा होता तो हिमाचलप्रदेश और कनार्टक में बीजेपी की सरकार आसानी से बन जाती। हां, अगर पार्टी ने मनमानी की तो कई दिग्गज पार्टी छोड़कर या तो निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरेंगे या फिर कुछ कांग्रेस में भी जा सकते हैं।
एक अन्य वरिष्ठ नेता के मुताबिक, मोदी युग शुरू होते ही पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र खत्म सा गया है। दिल्ली के चंद नेता ही निर्णय करते हैं और बाकी पालन करने वाले। कोई किसी को कुछ समझ नहीं रहा। इससे वरिष्ठ नेताओं में खिन्नता तो है ही। फिर टिकट काटने की धमकी से भी कई नेता परेशान हैं और हैरान हैं कि आखिर हो क्या रहा है ? भाजपा जैसा दल कॉरपोरेट कल्चर को फॉलो कर रहा है तो यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।
सूत्रों का कहना है कि पूर्व सीएम वसुंधराराजे तवज्जो नहीं मिलने से बेहद खफा हैं और वे उचित समय की तलाश कर रही हैं। उनके सिपहसालार भी मोर्चा संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। मतलब साफ है, आने वाला समय राजस्थान भाजपा के लिए बेहद चुनौनीपूर्ण होगा, इसमें दो राय नहीं।

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